मेरे कमरे में दो खिड़कियाँ थी | एक थोड़ी बड़ी थी , कमरे में रोशनी भी ज़्यादा करती थी | मुझे लगता था की दूसरी खिड़की कमरे की शो ख़राब ही कर रही है | फिर एक दिन घर में अलमारी आई तो मैंने उसे छोटी खिड़की के सामने लगा दिया जिससे की कमरे की शो मुझे अपने हिसाब की ठीक लगे | कई साल बीत गए कमरा वैसा ही दिखा | अभी कुछ दिन पहले घर में एक पूजा थी जो इसी कमरे में होनी थी | कमरे की सफाई और पूजा की व्यवस्था के लिए अलमारी हटाई गयी और उस छोटी खिड़की को खोला गया | उस छोटी खिड़की ने खुल कर कमरा पहले से ज़्यादा ख़ूबसूरत कर दिया | कमरे में रोशनी तो लगभग वैसी ही थी पर ताज़गी पहले से ज़्यादा थी | मुझे पहले के समय की याद आने लगी और उसी के साथ मै उस उम्र उस वक्त में चला गया जब मै इसी कमरे में वर्तमान से ज़्यादा खुश और मानसिक रूप से ज़्यादा स्वस्थ हुआ करता था | हमारे दिमाग में ऐसी तमाम खिड़कियाँ होती हैं जिनको हम खुद कई समय पहले खुद के लिए बंद कर देते हैं क्यों की उनकी उपस्तिथि का प्रभाव हम उस वक्त अनुभव नहीं कर पाते हैं | पर उनका महत्व होता है और वह समय के साथ ही समझ आता है | कभी अवसर आने पर वह बंद पड़ी खिड़की नज़र आये तो उसको खोल लिया कीजिए जीवन में रोशनी तो लगभग वैसी ही रहेगी पर ताज़गी पहेले से ज़्यादा आ जाएगी |
Very Impressive & motivating.always open this window in ur life
ReplyDeleteThank you..
Delete👍👍
ReplyDeleteThanks
ReplyDeleteVery motivating..
ReplyDeleteGreat work ��
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