रंजिश ये मेरे साथ हर रोज़ हो जाती है ,
जब तक समझता हूँ उजालों की असलियत
शाम हो जाती है !!
नाराज़ वक्त में ज़िन्दगी आईना हो जाती है ,
दोस्ती जागती है रात भर साथ में
आशिक़ी सो जाती है !!
दौलत के जूनून से अय॒याशी भी हार जाती है ,
अमीरी जागती है रात भर फ़िक्र में
गरीबी भूखी सो जाती है !!
हालातों के बदलते ही फितरत बदल जाती है
जैसे ही ढलता है सूरज शाम को
परछाई खो जाती है !!
जब तक समझता हूँ उजालों की असलियत
शाम हो जाती है !!
नाराज़ वक्त में ज़िन्दगी आईना हो जाती है ,
दोस्ती जागती है रात भर साथ में
आशिक़ी सो जाती है !!
दौलत के जूनून से अय॒याशी भी हार जाती है ,
अमीरी जागती है रात भर फ़िक्र में
गरीबी भूखी सो जाती है !!
हालातों के बदलते ही फितरत बदल जाती है
जैसे ही ढलता है सूरज शाम को
परछाई खो जाती है !!
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